श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.60.18 
यदि ताल त्वया दृष्टा पक्वतालोपमस्तनी।
कथयस्व वरारोहां कारुण्यं यदि ते मयि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे तालवृक्ष! यदि तुमने अपने पके फलों के समान स्तनों वाली सीता को देखा हो, तो मुझे बताओ। यदि तुम्हें मुझ पर दया आती हो, तो उस सुन्दरी के विषय में मुझे कुछ बताओ।॥18॥
 
'O Taal tree! If you have seen Sita whose breasts are like your ripe fruits, then tell me. If you feel pity for me, then do tell me something about that beautiful lady.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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