श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.60.14 
अथवार्जुन शंस त्वं प्रियां तामर्जुनप्रियाम्।
जनकस्य सुता तन्वी यदि जीवति वा न वा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'या अर्जुन! मेरी प्रियतमा को तुम्हारे पुष्प बहुत प्रिय थे, अतः कृपा करके मुझे उनके विषय में कुछ समाचार बताओ। वह दुबली-पतली जनकपुत्री जीवित है या नहीं?'
 
'Or Arjun! My beloved was very fond of your flowers, so please tell me some news about her. Is the slim Janak's daughter alive or not?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas