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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 3: अरण्य काण्ड
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सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत
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श्लोक 4
श्लोक
3.59.4
स्फुरते नयनं सव्यं बाहुश्च हृदयं च मे।
दृष्ट्वा लक्ष्मण दूरे त्वां सीताविरहितं पथि॥ ४॥
अनुवाद
'लक्ष्मण! मेरी बाईं आँख और बाएँ हाथ फड़क रहे हैं। तुम्हें सीता के बिना आश्रम से जाते देख मेरा हृदय धड़क रहा है।'॥4॥
‘Lakshman! My left eye and left arm are throbbing. My heart is pounding as I see you coming away from the ashram without Sita.'॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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