vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत
»
श्लोक 24
श्लोक
3.59.24
सर्वथा त्वपनीतं ते सीतया यत् प्रचोदित:।
क्रोधस्य वशमागम्य नाकरो: शासनं मम॥ २४॥
अनुवाद
सीताजी से प्रेरित होकर और क्रोध से व्याकुल होकर तुमने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया; यह तुम्हारा सर्वथा अन्याय है॥ 24॥
‘Inspired by Sita and overcome by anger, you did not obey my orders; this is totally unjust on your part.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×