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ramayan 3.59.2: 'लक्ष्मण! जब मैं सीता को तुम पर भरोसा करके वन में छोड़ आया था, तब तुम उसे अकेला छोड़कर क्यों लौट आए?॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 3.59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.59.2 
तमुवाच किमर्थं त्वमागतोऽपास्य मैथिलीम्।
यदा सा तव विश्वासाद् वने विरहिता मया॥ २॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! जब मैं सीता को तुम पर भरोसा करके वन में छोड़ आया था, तब तुम उसे अकेला छोड़कर क्यों लौट आए?॥ 2॥
 
'Laxman! When I left Sita in the forest trusting you, why did you leave her alone and come back?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)