श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 59: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.59.13 
राक्षसेनेरितं वाक्यं त्रासात् त्राहीति शोभने।
न भवत्या व्यथा कार्या कुनारीजनसेविता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'शोभने! उस राक्षस ने भय के कारण ऐसा कहा है (मुझे बचाओ)। तुम्हें दुःख नहीं करना चाहिए। केवल नीच कुल की स्त्रियाँ ही अपने मन में ऐसा दुःख आने देती हैं।॥13॥
 
‘Shobhane! That demon has uttered this (save me) out of fear. You should not be distressed. Only low class women allow such sorrow to enter their minds.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)