श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 57: श्रीराम का लौटना, मार्ग में अपशकुन देखकर चिन्तित होना तथा लक्ष्मण से सीता पर सङ्कट आने की आशङ्का करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.57.6 
स सौमित्रि: स्वरं श्रुत्वा तां च हित्वाथ मैथिलीम्।
तयैव प्रहित: क्षिप्रं मत्सकाशमिहैष्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'उस आवाज को सुनकर सुमित्रा का पुत्र लक्ष्मण सीता को अकेला छोड़कर तुरन्त मेरे पास आने के लिए निकल पड़ेगा, यदि वह उसे भेजे।
 
'On hearing that voice, Sumitra's son Lakshmana will leave Sita alone and immediately set out to reach me here if she sends him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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