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श्लोक 3.57.14  |
ततो लक्ष्मणमायान्तं ददर्श विगतप्रभम्।
ततोऽविदूरे रामेण समीयाय स लक्ष्मण:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| तभी उन्होंने लक्ष्मण को अपनी ओर आते देखा। उनका तेज क्षीण हो गया था। थोड़ी ही देर में लक्ष्मण निकट आए और श्री रामचंद्रजी से मिले॥ 14॥ |
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| Just then he saw Lakshmana coming towards him. His radiance had faded. In a short while Lakshmana came close and met Shri Ramchandraji.॥ 14॥ |
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