Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.56.36: मिथिला की पुत्री सीता को वहाँ भयानक मुख और नेत्रों वाली राक्षसी स्त्रियों की डाँट-फटकार से शांति नहीं मिली। भय और शोक से व्याकुल होकर वह अपने प्रिय पति और देवर का स्मरण करते-करते मूर्छित हो गईं। | ramayan सर्ग 3.56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न विन्दते तत्र तु शर्म मैथिली
विरूपनेत्राभिरतीव तर्जिता।
पतिं स्मरन्ती दयितं च देवरं
विचेतनाभूद् भयशोकपीडिता॥ ३६॥
अनुवाद
मिथिला की पुत्री सीता को वहाँ भयानक मुख और नेत्रों वाली राक्षसी स्त्रियों की डाँट-फटकार से शांति नहीं मिली। भय और शोक से व्याकुल होकर वह अपने प्रिय पति और देवर का स्मरण करते-करते मूर्छित हो गईं।
Sita, the daughter of Mithila, could not find peace there because of the scoldings and rebukes of the monstrous women with terrifying faces and eyes. Afflicted with fear and grief, she fainted while remembering her beloved husband and brother-in-law.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे षट्पञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें छप्पनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ ६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥