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श्लोक  3.56.34 
सा तु शोकपरीताङ्गी मैथिली जनकात्मजा।
राक्षसीवशमापन्ना व्याघ्रीणां हरिणी यथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
किन्तु वहाँ पहुँचते ही मिथिला की राजकुमारी जानकी के शरीर के हर अंग में शोक व्याप्त हो गया। उनकी स्थिति राक्षसों के वश में होकर बाघिनों के बीच फँसे हिरण के समान हो गई थी।
 
But on reaching there, grief pervaded every part of the body of Mithila princess Janaki. Her condition had become like that of a deer trapped among tigresses after falling under the control of the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)