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ramayan 3.56.30: हे राक्षसों! तुम सब लोग मिथिला की पुत्री सीता को अशोक वाटिका में ले जाओ और उसे चारों ओर से घेरकर वहाँ गुप्त रूप से उसकी रखवाली करो॥30॥   |   ramayan सर्ग 3.56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.56.30 
अशोकवनिकामध्ये मैथिली नीयतामिति।
तत्रेयं रक्ष्यतां गूढं युष्माभि: परिवारिता॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे राक्षसों! तुम सब लोग मिथिला की पुत्री सीता को अशोक वाटिका में ले जाओ और उसे चारों ओर से घेरकर वहाँ गुप्त रूप से उसकी रखवाली करो॥30॥
 
'O demons! You all take Sita, daughter of Mithila, to the Ashok Vatika and surround her from all sides and keep guarding her there secretly.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)