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ramayan 3.56.13: ‘तुम्हारा यह पाप कर्म तुम्हें भविष्य में सुख भोगने नहीं देगा; क्योंकि तुमने मुझे बलपूर्वक मेरे पति से दूर कर दिया है॥13॥   |   ramayan सर्ग 3.56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 56: सीता का श्रीराम के प्रति अपना अनन्य अनुराग दिखाकर रावण को फटकारना तथा रावण की आज्ञा से राक्षसियों का उन्हें अशोकवाटिका में ले जाकर डराना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.56.13 
न ते पापमिदं कर्म सुखोदर्कं भविष्यति।
याहं नीता विनाभावं पतिपार्श्वात् त्वया बलात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा यह पाप कर्म तुम्हें भविष्य में सुख भोगने नहीं देगा; क्योंकि तुमने मुझे बलपूर्वक मेरे पति से दूर कर दिया है॥13॥
 
‘This sinful act of yours will not allow you to enjoy happiness in the future; because you have forcibly taken me away from my husband.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)