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श्लोक  3.54.6-7h 
तां जहार सुसंहृष्टो रावणो मृत्युमात्मन:॥ ६॥
उत्सङ्गेनैव भुजगीं तीक्ष्णदंष्ट्रां महाविषाम्।
 
 
अनुवाद
रात्रि-दानव रावण सीता के रूप में अपनी मृत्यु को प्रसन्नतापूर्वक परास्त कर रहा था। वह अपनी गोद में वैदेही रूपी तीखे दांतों वाली अत्यंत विषैली सर्पिणी को लिए हुए था।
 
The night-demon Ravana was happily defeating his own death in the form of Sita. He was carrying in his lap a highly poisonous serpent with sharp teeth in the form of Vaidehi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)