श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 54: सीता का पाँच वानरों के बीच अपने भूषण और वस्त्र को गिराना, रावण का सीता को अन्तःपुर में रखना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.54.27 
अप्रमादाच्च गन्तव्यं सर्वैरेव निशाचरै:।
कर्तव्यश्च सदा यत्नो राघवस्य वधं प्रति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘तुम सब रात्रिचर प्राणी वहाँ सावधानी से जाओ और सदैव राम को मारने का प्रयत्न करो।॥27॥
 
‘All you night creatures should go there cautiously and always try to kill Rama.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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