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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 3: अरण्य काण्ड
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सर्ग 54: सीता का पाँच वानरों के बीच अपने भूषण और वस्त्र को गिराना, रावण का सीता को अन्तःपुर में रखना
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श्लोक 19
श्लोक
3.54.19
स तान् दृष्ट्वा महावीर्यो वरदानेन मोहित:।
उवाच तानिदं वाक्यं प्रशस्य बलवीर्यत:॥ १९॥
अनुवाद
उससे मिलकर महाबली रावण ब्रह्माजी के वरदान से प्रभावित होकर उसके बल और पराक्रम की प्रशंसा करते हुए उससे इस प्रकार बोला -॥19॥
Having met him, the mighty Ravana, impressed by Brahma's boon, praised his strength and valour and spoke to him thus -॥19॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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