Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.54.16-17h: 'तुममें से जो कोई भी व्यक्ति जाने-अनजाने में विदेह राजकुमारी सीता को कुछ भी अप्रिय कहेगा, मैं समझूँगा कि उसे अपना प्राण प्रिय नहीं है।'॥16 1/2॥ | ramayan सर्ग 3.54: सीता का पाँच वानरों के बीच अपने भूषण और वस्त्र को गिराना, रावण का सीता को अन्तःपुर में रखना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
या च वक्ष्यति वैदेहीं वचनं किंचिदप्रियम्॥ १६॥
अज्ञानाद् यदि वा ज्ञानान्न तस्या जीवितं प्रियम्।
अनुवाद
'तुममें से जो कोई भी व्यक्ति जाने-अनजाने में विदेह राजकुमारी सीता को कुछ भी अप्रिय कहेगा, मैं समझूँगा कि उसे अपना प्राण प्रिय नहीं है।'॥16 1/2॥
'Whoever amongst you knowingly or unknowingly says anything unpleasant to Videha Princess Sita, I will understand that he/she does not love his/her life.'॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥