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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 54: सीता का पाँच वानरों के बीच अपने भूषण और वस्त्र को गिराना, रावण का सीता को अन्तःपुर में रखना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  3.54.15-16h 
मुक्तामणिसुवर्णानि वस्त्राण्याभरणानि च॥ १५॥
यद् यदिच्छेत् तदैवास्या देयं मच्छन्दतो यथा।
 
 
अनुवाद
'जो कुछ भी वे चाहते हैं, चाहे वह मोती, रत्न, सोना, वस्त्र या आभूषण आदि हों, उन्हें तुरंत दे दिया जाए; यह मेरी खुली आज्ञा है॥15 1/2॥
 
'Whatever they desire, be it pearls, precious stones, gold, clothes or jewellery, etc., be given to them immediately; this is my open order.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)