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श्लोक  3.52.6 
तां क्लिष्टमाल्याभरणां विलपन्तीमनाथवत्।
अभ्यधावत वैदेहीं रावणो राक्षसाधिप:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसकी मालाएँ और आभूषण चूर-चूर हो गए थे। वह अनाथ की तरह विलाप कर रही थी। ऐसी हालत में, राक्षसराज रावण विदेह राजकुमारी सीता की ओर दौड़ा।
 
Her garlands and ornaments were crushed and torn to pieces. She was wailing like an orphan. In that condition, the demon king Ravana ran towards Videha princess Sita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)