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ramayan 3.52.41-42h: सीता को जोर-जोर से पुकारते हुए तथा अत्यंत दुःखी सीता की ओर बार-बार असाधारण नेत्रों से देखते हुए वन देवताओं के अंग भय से काँपने लगे।   |   ramayan सर्ग 3.52: रावण द्वारा सीता का अपहरण   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 52: रावण द्वारा सीता का अपहरण  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  3.52.41-42h 
उद्वीक्ष्योद्वीक्ष्य नयनैर्भयादिव विलक्षणै:।
सुप्रवेपितगात्राश्च बभूवुर्वनदेवता:॥ ४१॥
विक्रोशन्तीं दृढं सीतां दृष्ट्वा दु:खं तथा गताम्।
 
 
अनुवाद
सीता को जोर-जोर से पुकारते हुए तथा अत्यंत दुःखी सीता की ओर बार-बार असाधारण नेत्रों से देखते हुए वन देवताओं के अंग भय से काँपने लगे।
 
Seeing Sita loudly calling out to Sri Rama and looking repeatedly with their extraordinary eyes at her who was in great sorrow, the limbs of the forest deities began to tremble with fear. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)