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श्लोक  3.52.4 
अयं हि कृपया राम मां त्रातुमिह संगत:।
शेते विनिहतो भूमौ ममाभाग्याद् विहंगम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'हे राम! मैं कितना अभागा हूँ कि जो पक्षी जटायु मुझे बचाने आया था, वह इस रात्रिभक्त के द्वारा मारा गया और पृथ्वी पर पड़ा है।
 
'Oh Rama! How unfortunate am I that the bird Jatayu, who had kindly come to save me, has been killed by this night-devotee and is lying on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)