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श्लोक  3.52.29 
चरणान्नूपुरं भ्रष्टं वैदेह्या रत्नभूषितम्।
विद्युन्मण्डलसंकाशं पपात धरणीतले॥ २९॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी की रत्नजड़ित पायल उसके एक पैर से फिसलकर बिजली के गोले की तरह पृथ्वी पर गिर पड़ी।
 
The jeweled anklet of Videhanandini slipped from one of her feet and fell on the earth like a sphere of electricity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)