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ramayan 3.51.6: तत्पश्चात् पराक्रमी पक्षीशिरोमणि ने अपने तीखे नाखूनों से रावण के शरीर पर अनेक घाव कर दिये।   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.51.6 
तस्य तीक्ष्णनखाभ्यां तु चरणाभ्यां महाबल:।
चकार बहुधा गात्रे व्रणान् पतगसत्तम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी पक्षीशिरोमणि ने अपने तीखे नाखूनों से रावण के शरीर पर अनेक घाव कर दिये।
 
Thereafter the mighty Pakshishiromani inflicted many wounds on Ravana's body by hitting him with his claws having sharp nails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)