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ramayan 3.51.39: जब वे भुजाएँ कट गईं, तो अचानक नई भुजाएँ उग आईं, जैसे बिल से विषैली ज्वालाओं की माला पहने हुए सर्प निकल रहे हों ॥39॥   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.51.39 
संछिन्नबाहो: सद्यो वै बाहव: सहसाभवन्।
विषज्वालावलीयुक्ता वल्मीकादिव पन्नगा:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब वे भुजाएँ कट गईं, तो अचानक नई भुजाएँ उग आईं, जैसे बिल से विषैली ज्वालाओं की माला पहने हुए सर्प निकल रहे हों ॥39॥
 
When those arms were cut off, new arms suddenly sprang up, like serpents with garlands of poisonous flames emerging from a hole. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)