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ramayan 3.51.35: नख, पंख और चोंच - ये जटायु के अस्त्र-शस्त्र थे। वह अपने नाखूनों से खरोंचता, पीठ पर चोंच मारता और बाल पकड़कर उखाड़ता था। 35.   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.51.35 
विददार नखैरस्य तुण्डं पृष्ठे समर्पयन्।
केशांश्चोत्पाटयामास नखपक्षमुखायुध:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नख, पंख और चोंच - ये जटायु के अस्त्र-शस्त्र थे। वह अपने नाखूनों से खरोंचता, पीठ पर चोंच मारता और बाल पकड़कर उखाड़ता था। 35.
 
Nails, wings and beak - these were the weapons of Jatayu. He used to scratch with his nails, peck on the back and grab the hair and pull it out. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)