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ramayan 3.51.32: 'जो कर्म कर्ता को पाप के फल से युक्त करता है, उसे कौन निश्चयपूर्वक कर सकता है? लोकपाल इन्द्र और भगवान् स्वयंभू (ब्रह्मा) भी ऐसा कर्म नहीं कर सकते।'॥32॥   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.51.32 
पापानुबन्धो वै यस्य कर्मण: को नु तत् पुमान्।
कुर्वीत लोकाधिपति: स्वयंभूर्भगवानपि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'जो कर्म कर्ता को पाप के फल से युक्त करता है, उसे कौन निश्चयपूर्वक कर सकता है? लोकपाल इन्द्र और भगवान् स्वयंभू (ब्रह्मा) भी ऐसा कर्म नहीं कर सकते।'॥32॥
 
‘Who can certainly perform that action which brings the doer into contact with the results of sin? Even the Lokpal Indra and Lord Swayambhu (Brahma) cannot perform such an action.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)