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ramayan 3.51.31: 'जैसे मनुष्य विनाश के समय कर्म करता है, वैसे ही तूने भी अपने विनाश के लिए उन्हीं अधर्ममय कर्मों को अपनाया है।॥31॥   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.51.31 
परेतकाले पुरुषो यत् कर्म प्रतिपद्यते।
विनाशायात्मनोऽधर्म्यं प्रतिपन्नोऽसि कर्म तत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'जैसे मनुष्य विनाश के समय कर्म करता है, वैसे ही तूने भी अपने विनाश के लिए उन्हीं अधर्ममय कर्मों को अपनाया है।॥31॥
 
'Just as a man performs actions at the time of destruction, you too have adopted the same unrighteous actions for your own destruction.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)