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ramayan 3.51.17-18: तत्पश्चात् पूर्ण चन्द्रमा के समान सुशोभित छत्र और चँवर को तथा उन्हें धारण करने वाले राक्षसों को शीघ्रतापूर्वक मार डाला गया। तत्पश्चात् उस महातेजस्वी पक्षीराज ने बड़ी जोर से चोंच मारकर रावण के सारथि का विशाल सिर धड़ से अलग कर दिया॥17-18॥   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  3.51.17-18 
पूर्णचन्द्रप्रतीकाशं छत्रं च व्यजनै: सह।
पातयामास वेगेन ग्राहिभी राक्षसै: सह॥ १७॥
सारथेश्चास्य वेगेन तुण्डेन च महच्छिर:।
पुनर्व्यपहनच्छ्रीमान् पक्षिराजो महाबल:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पूर्ण चन्द्रमा के समान सुशोभित छत्र और चँवर को तथा उन्हें धारण करने वाले राक्षसों को शीघ्रतापूर्वक मार डाला गया। तत्पश्चात् उस महातेजस्वी पक्षीराज ने बड़ी जोर से चोंच मारकर रावण के सारथि का विशाल सिर धड़ से अलग कर दिया॥17-18॥
 
After this, the umbrella and chavara which were decorated like the full moon were swiftly killed along with the demons who were carrying them. Then that mighty and radiant bird king beaked with great force and severed the huge head of Ravana's charioteer from his body.॥ 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)