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ramayan 3.51.16: तत्पश्चात उसका विशाल रथ, जो अग्नि के समान चमक रहा था, विचित्र अंगों से युक्त था, रत्नजटित था और इच्छानुसार चलने वाला था, वह भी टूट गया॥16॥   |   ramayan सर्ग 3.51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 51: जटायु तथा रावण का घोर युद्ध और रावण के द्वारा जटायु का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.51.16 
अथ त्रिवेणुसम्पन्नं कामगं पावकार्चिषम्।
मणिसोपानचित्राङ्गं बभञ्ज च महारथम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात उसका विशाल रथ, जो अग्नि के समान चमक रहा था, विचित्र अंगों से युक्त था, रत्नजटित था और इच्छानुसार चलने वाला था, वह भी टूट गया॥16॥
 
After that, his huge chariot, which was shining like fire, having strange limbs with precious stones and moving as per the wish, was also broken. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)