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श्लोक  3.51.14 
तच्चाग्निसदृशं दीप्तं रावणस्य शरावरम्।
पक्षाभ्यां च महातेजा व्यधुनोत् पतगेश्वर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रावण का कवच अग्नि के समान प्रज्वलित हो रहा था। पराक्रमी पक्षीराज ने अपने पंखों से उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Ravana's armour was blazing like fire. The mighty bird king smashed it into pieces with his wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)