Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.50.3-4h: 'दशमुख रावण! मैं प्राचीन (सनातन) धर्म में स्थित, सत्य की प्रतिज्ञा करने वाला और देवताओं में सबसे शक्तिशाली राजा हूँ। मेरा नाम जटायु है। भाई! इस समय तुम्हें मेरे सामने ऐसा निन्दनीय कार्य नहीं करना चाहिए। 3 1/2॥ | ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'दशमुख रावण! मैं प्राचीन (सनातन) धर्म में स्थित, सत्य की प्रतिज्ञा करने वाला और देवताओं में सबसे शक्तिशाली राजा हूँ। मेरा नाम जटायु है। भाई! इस समय तुम्हें मेरे सामने ऐसा निन्दनीय कार्य नहीं करना चाहिए। 3 1/2॥
'Dashmukh Ravana! I am situated in the ancient (Sanatan) religion, the one who has pledged his truth and is the most powerful king of Gods. My name is Jatayu. Brother At this time you should not do such a condemnable act in front of me. 3 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥