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ramayan 3.50.28: दशमुख रावण! ठहरो, ठहरो! दो क्षण रुको, फिर देखो, जैसे फल अपनी डंडी से गिर जाता है, वैसे ही मैं तुम्हें इस उत्तम रथ से नीचे गिरा दूँगा। हे रात्रि-राक्षस! युद्ध में मैं अपनी शक्ति के अनुसार तुम्हारा भरपूर सत्कार करूँगा - तुम्हें भरपूर दान और पूजन दूँगा।॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.50.28 
तिष्ठ तिष्ठ दशग्रीव मुहूर्तं पश्य रावण।
वृन्तादिव फलं त्वां तु पातयेयं रथोत्तमात्।
युद्धातिथ्यं प्रदास्यामि यथाप्राणं निशाचर॥ २८॥
 
 
अनुवाद
दशमुख रावण! ठहरो, ठहरो! दो क्षण रुको, फिर देखो, जैसे फल अपनी डंडी से गिर जाता है, वैसे ही मैं तुम्हें इस उत्तम रथ से नीचे गिरा दूँगा। हे रात्रि-राक्षस! युद्ध में मैं अपनी शक्ति के अनुसार तुम्हारा भरपूर सत्कार करूँगा - तुम्हें भरपूर दान और पूजन दूँगा।॥ 28॥
 
‘Dashamukh Ravana! Wait, wait! Wait for just two moments, then see, just like a fruit falls from its stalk, in the same manner I will throw you down from this excellent chariot. O night-demon! According to my strength I will treat you with full hospitality in the war – I will give you ample gifts and worship.’॥ 28॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे पञ्चाश: सर्ग:॥ ५०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें पचासवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)