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ramayan 3.50.27: ‘मुझे महात्मा श्री राम और राजा दशरथ को प्रिय लगने वाले कार्य को अपने प्राणों की कीमत पर भी करना होगा।॥27॥   |   ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.50.27 
अवश्यं तु मया कार्यं प्रियं तस्य महात्मन:।
जीवितेनापि रामस्य तथा दशरथस्य च॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘मुझे महात्मा श्री राम और राजा दशरथ को प्रिय लगने वाले कार्य को अपने प्राणों की कीमत पर भी करना होगा।॥27॥
 
‘I must carry out the work that is dear to Mahatma Shri Ram and King Dasharath, even at the cost of my life.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)