Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.50.22: 'तुम मेरे सामने विदेहनन्दिनी सीता का बलपूर्वक अपहरण नहीं कर सकते; जैसे कोई भी व्यक्ति युक्तिपूर्वक सत्य सिद्ध किये गये वैदिक शास्त्रों को अपने तर्कों के आधार पर नहीं बदल सकता। | ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शक्तस्त्वं बलाद्धर्तुं वैदेहीं मम पश्यत:।
हेतुभिर्न्यायसंयुक्तैर्ध्रुवां वेदश्रुतीमिव॥ २२॥
अनुवाद
'तुम मेरे सामने विदेहनन्दिनी सीता का बलपूर्वक अपहरण नहीं कर सकते; जैसे कोई भी व्यक्ति युक्तिपूर्वक सत्य सिद्ध किये गये वैदिक शास्त्रों को अपने तर्कों के आधार पर नहीं बदल सकता।
‘You cannot abduct Videhanandini Sita forcefully in front of me; just as no one can change the Vedic scriptures, which have been proved true by reasonable reasons, on the basis of his own arguments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥