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ramayan 3.50.17: तूने अपने वस्त्रों में विषैले सर्प को बाँध लिया है, फिर भी तू यह बात नहीं समझ पा रहा है। तूने अपने गले में मृत्यु का पाश डाल लिया है, फिर भी तू यह बात नहीं समझ पा रहा है॥17॥   |   ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.50.17 
सर्पमाशीविषं बद्‍ध्वा वस्त्रान्ते नावबुध्यसे।
ग्रीवायां प्रतिमुक्तं च कालपाशं न पश्यसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तूने अपने वस्त्रों में विषैले सर्प को बाँध लिया है, फिर भी तू यह बात नहीं समझ पा रहा है। तूने अपने गले में मृत्यु का पाश डाल लिया है, फिर भी तू यह बात नहीं समझ पा रहा है॥17॥
 
‘You have tied a poisonous snake in your clothes, yet you are unable to understand this. You have put the noose of death around your neck, yet you are unable to understand this.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)