Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.50.12: 'जिस मनुष्य का स्वभाव काम प्रधान है, उसका स्वभाव कभी नहीं सुधर सकता, क्योंकि दुष्टात्माओं के घर में बहुत काल तक रहने पर भी पुण्य निवास नहीं करता।॥12॥ | ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामस्वभावो य:सोऽसौ न शक्यस्तं प्रमार्जितुम्।
नहि दुष्टात्मनामार्यमावसत्यालये चिरम्॥ १२॥
अनुवाद
'जिस मनुष्य का स्वभाव काम प्रधान है, उसका स्वभाव कभी नहीं सुधर सकता, क्योंकि दुष्टात्माओं के घर में बहुत काल तक रहने पर भी पुण्य निवास नहीं करता।॥12॥
'The nature of a person whose nature is dominated by lust cannot be reformed because virtue does not reside in the home of evil souls even after a long time.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥