Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.50.10: राजा धर्म और काम का प्रवर्तक है तथा धन का उत्तम भण्डार है। अतः राजा ही धर्म, सदाचार या पाप की प्रवृत्तियों का मूल कारण है॥10॥ | ramayan सर्ग 3.50: जटायु का रावण को सीताहरण के दुष्कर्म से निवृत्त होने के लिये समझाना और अन्त में युद्ध के लिये ललकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा धर्मश्च कामश्च द्रव्याणां चोत्तमो निधि:।
धर्म: शुभं वा पापं वा राजमूलं प्रवर्तते॥ १०॥
अनुवाद
राजा धर्म और काम का प्रवर्तक है तथा धन का उत्तम भण्डार है। अतः राजा ही धर्म, सदाचार या पाप की प्रवृत्तियों का मूल कारण है॥10॥
‘The king is the promoter of Dharma and Kama and is the best repository of wealth. Hence the king is the root cause of the tendencies of Dharma, good conduct or sin.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥