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ramayan 3.49.4: हे काम और सौन्दर्य में उन्मत्त स्त्री! यदि मैं चाहूँ तो अपने तीखे बाणों से सूर्य को भी कष्ट दे सकता हूँ और इस पृथ्वी को भी भेद सकता हूँ। मैं इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करने में समर्थ हूँ। तुम मेरी ओर देखो।॥4॥   |   ramayan सर्ग 3.49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.49.4 
अर्कं तुद्यां शरैस्तीक्ष्णैर्विभिन्द्यां हि महीतलम्।
कामरूपेण उन्मत्ते पश्य मां कामरूपिणम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे काम और सौन्दर्य में उन्मत्त स्त्री! यदि मैं चाहूँ तो अपने तीखे बाणों से सूर्य को भी कष्ट दे सकता हूँ और इस पृथ्वी को भी भेद सकता हूँ। मैं इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करने में समर्थ हूँ। तुम मेरी ओर देखो।॥4॥
 
‘O woman who is mad with lust and beauty! If I want, I can trouble even the Sun with my sharp arrows and pierce this earth as well. I am capable of assuming any form as per my wish. You look at me.’॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)