Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.49.24: हे महाबाहु लक्ष्मण! आप ही बड़ों के मन को प्रसन्न करने वाले हैं। इस समय एक राक्षस, जो इच्छानुसार रूप धारण कर रहा है, मुझे ले जा रहा है, किन्तु आपको इसका पता नहीं है॥ 24॥ | ramayan सर्ग 3.49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हा लक्ष्मण महाबाहो गुरुचित्तप्रसादक।
ह्रियमाणां न जानीषे रक्षसा कामरूपिणा॥ २४॥
अनुवाद
हे महाबाहु लक्ष्मण! आप ही बड़ों के मन को प्रसन्न करने वाले हैं। इस समय एक राक्षस, जो इच्छानुसार रूप धारण कर रहा है, मुझे ले जा रहा है, किन्तु आपको इसका पता नहीं है॥ 24॥
'Oh mighty-armed Lakshmana! You are the one who pleases the minds of the elders. At this moment, a demon who assumes any form at will is taking me away, but you are unaware of this.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥