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ramayan 3.48.23: 'इन्द्र की पत्नी शची का हरण करके कोई बच सकता है; परन्तु मुझ राम की पत्नी सीता का हरण करके कोई नहीं बच सकता।॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 3.48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.48.23 
अपहृत्य शचीं भार्यां शक्यमिन्द्रस्य जीवितुम्।
नहि रामस्य भार्यां मामानीय स्वस्तिमान् भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'इन्द्र की पत्नी शची का हरण करके कोई बच सकता है; परन्तु मुझ राम की पत्नी सीता का हरण करके कोई नहीं बच सकता।॥ 23॥
 
'It is possible that someone may survive after abducting Indra's wife Shachi; but no one can survive after abducting me, Sita, the wife of Rama.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)