श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.48.2 
भ्राता वैश्रवणस्याहं सापत्नो वरवर्णिनि।
रावणो नाम भद्रं ते दशग्रीव: प्रतापवान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
'सुन्दरी! मैं परम प्रतापी दशग्रीव रावण हूँ, कुबेर का सौतेला भाई हूँ। तुम्हारा कल्याण हो॥ 2॥
 
'Beautiful girl! I am the most glorious Dashagriva Ravana, the step brother of Kubera. May you be blessed.॥ 2॥
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