Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.47.7-8h: 'कैकेयी ने मेरे ससुर को सतीत्व की शपथ दिलाकर उन्हें वचनबद्ध किया। फिर उसने अपने सत्यनिष्ठ पति, उस यशस्वी राजा से दो वर मांगे - मेरे पति को वनवास और भरत का राज्याभिषेक।' | ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'कैकेयी ने मेरे ससुर को सतीत्व की शपथ दिलाकर उन्हें वचनबद्ध किया। फिर उसने अपने सत्यनिष्ठ पति, उस यशस्वी राजा से दो वर मांगे - मेरे पति को वनवास और भरत का राज्याभिषेक।'
'Kaikeyi made my father-in-law swear on virtue and bound him to a promise. Then she asked for two boons from her truthful husband, that eminent king - exile for my husband and coronation of Bharata.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥