Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.47.6: 'जब श्री रघुनाथजी के राज्याभिषेक के लिए सामग्री एकत्रित की जा रही थी, उस समय मेरी सास कैकेयी ने अपने पति से वर मांगा।   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.47.6 
तस्मिन् सम्भ्रियमाणे तु राघवस्याभिषेचने।
कैकेयी नाम भर्तारं ममार्या याचते वरम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'जब श्री रघुनाथजी के राज्याभिषेक के लिए सामग्री एकत्रित की जा रही थी, उस समय मेरी सास कैकेयी ने अपने पति से वर मांगा।
 
'When the materials were being gathered for the coronation of Sri Raghunatha, at that time my mother-in-law Kaikeyi asked for a boon from her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)