Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.47.50: सीता को काँपते देख, मृत्यु के समान शक्तिशाली रावण ने उनके हृदय में भय उत्पन्न करने के लिए अपने वंश, बल, नाम और कर्म का परिचय देना आरम्भ किया।   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.47.50 
तां वेपमानामुपलक्ष्य सीतां
स रावणो मृत्युसमप्रभाव:।
कुलं बलं नाम च कर्म चात्मन:
समाचचक्षे भयकारणार्थम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
सीता को काँपते देख, मृत्यु के समान शक्तिशाली रावण ने उनके हृदय में भय उत्पन्न करने के लिए अपने वंश, बल, नाम और कर्म का परिचय देना आरम्भ किया।
 
Seeing Sita trembling, Ravana, who had the power of death, began introducing his lineage, strength, name and deeds to create fear in her heart.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डे सप्तचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें सैंतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)