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ramayan 3.47.48: "जब सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र के समान पराक्रमी भगवान् राम हाथ में धनुष-बाण लेकर खड़े होंगे, तब यदि तुम मेरा अपहरण भी कर लोगे, तो भी मुझे नहीं पचा पाओगे, जैसे मक्खी घी पीकर भी उसे नहीं पचा पाती।"॥48॥   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.47.48 
तस्मिन् सहस्राक्षसमप्रभावे
रामे स्थिते कार्मुकबाणपाणौ।
हृतापि तेऽहं न जरां गमिष्ये
आज्यं यथा मक्षिकयावगीर्णम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
"जब सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र के समान पराक्रमी भगवान् राम हाथ में धनुष-बाण लेकर खड़े होंगे, तब यदि तुम मेरा अपहरण भी कर लोगे, तो भी मुझे नहीं पचा पाओगे, जैसे मक्खी घी पीकर भी उसे नहीं पचा पाती।"॥48॥
 
"When Lord Rama, who is as powerful as the thousand-eyed Indra, will stand with bow and arrow in his hands, then even if you kidnap me you will not be able to digest me, just like a fly cannot digest ghee even after drinking it." ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)