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ramayan 3.47.35: उनकी भुजाएँ बड़ी और वक्षस्थल चौड़ा है। वे सिंह के समान पैर फैलाकर गर्व से चलते हैं और सिंह के समान पराक्रमी हैं। उन सिंहरूपी श्री रामजी में मेरी अनन्य भक्ति है॥ 35॥   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.47.35 
महाबाहुं महोरस्कं सिंहविक्रान्तगामिनम्।
नृसिंहं सिंहसंकाशमहं राममनुव्रता॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उनकी भुजाएँ बड़ी और वक्षस्थल चौड़ा है। वे सिंह के समान पैर फैलाकर गर्व से चलते हैं और सिंह के समान पराक्रमी हैं। उन सिंहरूपी श्री रामजी में मेरी अनन्य भक्ति है॥ 35॥
 
‘His arms are large and chest is broad. He walks proudly with legs extended like a lion and is as valiant as a lion. I have exclusive devotion towards that lion-like Shri Ram.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)