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ramayan 3.47.34: श्री रामचन्द्रजी समस्त शुभ गुणों से युक्त हैं, वटवृक्ष के समान हैं, अपनी छाया में सबको आश्रय देते हैं, सत्यवादी हैं और परम सौभाग्यशाली हैं। मैं उनका अनन्य भक्त हूँ॥ 34॥   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.47.34 
सर्वलक्षणसम्पन्नं न्यग्रोधपरिमण्डलम्।
सत्यसंधं महाभागमहं राममनुव्रता॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी समस्त शुभ गुणों से युक्त हैं, वटवृक्ष के समान हैं, अपनी छाया में सबको आश्रय देते हैं, सत्यवादी हैं और परम सौभाग्यशाली हैं। मैं उनका अनन्य भक्त हूँ॥ 34॥
 
‘Shri Ramachandraji is blessed with all auspicious qualities, like a banyan tree, he gives shelter to everyone under his shade, is truthful and extremely fortunate. I am his exclusive devotee.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)