Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.47.33: मेरे पति भगवान श्री राम महान पर्वत के समान अविचल, इंद्र के समान पराक्रमी और समुद्र के समान शान्त हैं। उन्हें कोई विचलित नहीं कर सकता। मैं पूरे मन, मन और आत्मा से उनका अनुसरण करती हूँ और उनकी भक्त हूँ॥ 33॥ | ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे पति भगवान श्री राम महान पर्वत के समान अविचल, इंद्र के समान पराक्रमी और समुद्र के समान शान्त हैं। उन्हें कोई विचलित नहीं कर सकता। मैं पूरे मन, मन और आत्मा से उनका अनुसरण करती हूँ और उनकी भक्त हूँ॥ 33॥
‘My husband Lord Shri Ram is as unshakable as a great mountain, as powerful as Indra and as calm as the ocean. No one can disturb him. I follow him with all my heart, mind and soul and am his devotee.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥