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श्लोक 3.47.30  |
तत्र सीते मया सार्धं वनेषु विचरिष्यसि।
न चास्य वनवासस्य स्पृहयिष्यसि भामिनि॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| 'सीते! वहाँ रहकर तुम मेरे साथ नाना प्रकार के वनों में विचरण करोगी। भामिनी! फिर तुम्हें इस वन में जाने की इच्छा कभी नहीं होगी॥30॥ |
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| 'Sita! While staying there you will roam with me in various types of forests. Bhaamini! Then you will never have the desire of going to this forest again.॥ 30॥ |
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