श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.47.23-24 
रुरून् गोधान् वराहांश्च हत्वाऽऽदायामिषं बहु॥ २३॥
स त्वं नाम च गोत्रं च कुलमाचक्ष्व तत्त्वत:।
एकश्च दण्डकारण्ये किमर्थं चरसि द्विज॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘रुरु, छिपकली और जंगली सूअर आदि भयंकर पशुओं का वध करके वह शीघ्र ही तपस्वियों के खाने योग्य बहुत से फल और मूल लेकर आएगा (उस समय तेरा विशेष सम्मान होगा)। हे ब्रह्मन्! अब तू भी अपना नाम, वंश और कुल ठीक-ठीक बता। तू इस दण्डकारण्य में अकेला क्यों विचरण करता है?’॥23-24॥
 
‘After killing the ferocious animals like Ruru, monitor lizard and wild boar, he will soon come with a lot of fruits and roots suitable for the consumption of ascetics (at that time you will be specially honoured). O Brahman! Now you too should give the correct information about your name, lineage and clan. Why do you wander alone in this Dandakaranya?’॥23-24॥
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