Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.47.21-23h: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! इस प्रकार कैकेयी के कारण राज्य से वंचित हम तीनों अपने-अपने बल पर इस घने वन में भटक रहे हैं। यदि तुम लोग यहाँ रुक सको, तो कुछ देर विश्राम कर लो। मेरे स्वामी बहुत से जंगली फल-मूल लेकर लौटते होंगे। | ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! इस प्रकार कैकेयी के कारण राज्य से वंचित हम तीनों अपने-अपने बल पर इस घने वन में भटक रहे हैं। यदि तुम लोग यहाँ रुक सको, तो कुछ देर विश्राम कर लो। मेरे स्वामी बहुत से जंगली फल-मूल लेकर लौटते होंगे।
'O best of Brahmins! Thus, we three, deprived of the kingdom because of Kaikeyi, are wandering in this dense forest relying on our own strength. If you can stay here, then rest for a while. My master will be returning with a lot of wild fruits and roots.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥